गंगा नदी के किनारे बसा शहर पटना अपने कई स्मारकों और धरोहरों के लिए विश्व प्रशिद्ध है, इन्ही में से एक पटना के गाँधी मैदान के पास स्थित गोलघर है | बिहार की राजधानी पटना जिसे पहले पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था मौर्या और गुप्त साम्राज्यों का केंद्र रहा है, गोलघर यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है | गोलघर एक विशाल भण्डारण कक्ष है जिसकी योजना ब्रिटिश गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने बनायीं थी |

गोलघर की संरचना / Structure of Golghar

गोलघर के संरचना की बात की जाये तो यह एक 29 मीटर ऊँची गोलाकार संरचना में बना भण्डारण कक्ष है जिसका आकार 125 मीटर है | इस इमारत की एक खास बात यह है की इसमें कोई भी स्तंभ नहीं लगा है | गोलघर के शिखर पर लगभग 3 मीटर तक इट की जगह पत्थरो का प्रयोग किया गया है, और इसकी दीवारें 3.6 मीटर मोटी हैं | यह इमारत अनाज भण्डारण के लिए बनायीं गयी थी | इसके उपरी शिखर पर २ फिट 7 इंच व्यास का एक होल था जहा से अनाज डाला जाता था | उपरी शिखर तक जाने के लिए 145 सीढियाँ चढ़नी पड़ती थी |

कुछ वर्षो तक इन सीढियों को पर्यटकों के लिए खोला गया था लेकिन इमारत काफी पुरानी होने की वजह से अब इन्हें बंद कर दिया गया है | गोलघर के उपरी शिखर से आप पटना शहर के अधिकांश भूभाग को देख सकते है |

गोलघर का इतिहास / History of Golghar

पटना शहर में स्थित गोलघर एक ऐतिहासिक इमारत है | इसका निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरू हुआ जिसके बाद यह इमारत 20 जुलाई 1786 में बनकर तैयार हुई | गोलघर के इतिहास की बात करें तो 1770 में आये भयंकर सूखे के दौरान बहुत सारे लोग भुखमरी के शिकार हो गए यह संख्या करोंड़ों में थी | तब गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग एक योजना बनायीं की लोग इस इमारत को बनाने का काम करें जिससे उनको भोजन मिल सके | ब्रिटिश इंजिनियर कप्तान जॉन गार्स्टिंग ने अनाज के भण्डारण के लिए इस गोल इमारत का निर्माण कराया| यह इमारत ब्रिटिश सेना के लिए बनायीं गयी थी जिसमे उनके लिए अनाज रखा जा सके | इस इमारत का निर्माण कप्तान ने 20 जनवरी 1784 को शुरू कराया था | इस इमारत को देहाती भाषा में डेहरी कहा जाता था | गोलघर का निर्माण ब्रिटिश राज्य में 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ था तभी से ये लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है |इस इमारत में एक साथ 140000 टन अनाज रखा जा सकता है |

कैसे पहुचें / How to Reach

गोलघर पहुचने के लिए सबसे पहले आपको बिहार की राजधानी पटना पहुचना होगा | गोलघर पटना के मध्य में गाँधी मैदान के पास स्थित है यहाँ पहुचने के लिए आप पटना के किसी भी हिस्से से कैब बुक कर पहुच सकते हैं |इसके अलावा आप स्थानीय ऑटो रिक्सा बुक कर सकते है साथ ही पटना city बसें भी गाँधी मैदान से होकर गुज़रती है |

प्रवेश शुल्क / Entry Ticket

गोलघर कैंपस में प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 10 रूपये टिकट लगता है |

गोलघर के खुलने का समय / Golghar opening hours

यह प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम के 6:30 बजे तक खुला रहता है |

गोलघर के बारे में और अधिक जानने के लिए आप निचे दिए हुए video को देख सकते है |

लेखक :सर्वेश उपाध्याय

मैं सर्वेश उपाध्याय इस ब्लॉग के माध्यम से आपको बिहार के पटना में स्थित गोलघर लेकर आया हूँ जो एक ऐतिहासिक इमारत है जिसे ब्रिटिश सरकार ने बनवाया था | इस ब्लॉग के माध्यम से हमने ये कोशिश की है कि आपको गोलघर से जुडी जानकारी दे सकें जिससे की यदि आप गोलघर घुमने जाये तो आपको आसानी हो |

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